कुछ अजीब है वो..
कहने को तो,
कचरा बीनता है वो..
पर उस कचरे के संग
भर लेता है ,
अपनी दुनिया में रंग..
चुन लेता है,
इक रूखी सी मुस्कान..
कमा लेता है,
रोटी दो वक्त की..
संजो लेता है,
कुछ अधुरे ख्वाब..
और उठा जाता है,
कुछ गंदगी हमारी..
कितना कुछ ले जाता है वो,
कचरे के साथ..

और कहने को,
बस कचरा बीनता है वो..

image

Advertisements